शुक्रवार, 20 मई 2011

kismat....

किस्मत....

 ख्वाहिशों को अन्दाजें बयाँ की जरूरत नहीं होती,
 वादियों को तमन्नाएं आसमां से फुर्सत नहीं होती,
 रुक्सत तो होती हैं हर किसी की डोलियाँ,
 पर हर डोली की किस्मत में ज़िन्दगी खूबसूरत नहीं होती!!

36 टिप्‍पणियां:

  1. काश! हर डोली की किस्मत में खूबसूरत जिंदगी हो.
    पर कहा तो यही गया है कि 'मुकद्दर पर किसी को जोर नहीं.'
    गुरू वशिष्ठ जी राम वन गमन पर भरत जी को समझा कर कहतें हैं
    "सुनहु भरत भावी प्रबल,विलखु कहू मुनि नाथ
    हानि लाभ जीवन मरण जस अपजस विधि हाथ"

    आपकी सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार..

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  2. बहुत सुंदर.....कमाल की पंक्तियाँ लिखी हैं नेहा .....

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  3. टिप्पणी देकर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
    वाह ! क्या बात है ! बहुत सुन्दर लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  4. "ख्वाहिशों को अन्दाजें बयाँ की जरूरत नहीं होती"
    आपका अन्दाजें बयाँ पसंद आया.

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  5. ख्वाहिशों को अन्दाजें बयाँ की जरूरत नहीं होती...

    आपने बहुत सुन्दर शब्दों में अपनी बात कही है। शुभकामनायें।

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  6. बहुत खूब ...सच ही हर डोली की किस्मत खूबसूरत नहीं होती ...

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  7. रुक्सत तो होती हैं हर किसी की डोलियाँ,
    पर हर डोली की किस्मत में ज़िन्दगी खूबसूरत नहीं होती!!

    सुभानाल्लाह .....!!

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  8. बहुत सुन्दर शब्दों में अपनी बात कही है, आपकी बेहतरीन प्रस्तुति के लिए शुभकामनायें.

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  9. बहुत सुंदर बेहतरीन प्रस्तुति के लिए शुभकामनायें...

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  10. Dil bhar aaya aapki khubsurat kavita padh kar.... Bahut sundar , aapka samarthak banna chahta hun...

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  11. हमारे ब्लॉग पर आने क लिए पहले तो आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया........
    अच्छा लगा की आप सभी को हमारा कुछ लिखा पसंद आया.......पूरी कोशिश रहेगी की आगे भी जो लिखूं वो आपके मन को छुए! ! बहुत बहुत धन्यवाद :) :)

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  12. Neha ji
    first of all I welcome you in the world of blogging and wish you all the success in future, now let me tell u something about your 4 liners, they are only 4 but explain 4000 types of situations, feelings in them.
    you write very well and of course with time, you will mature more.
    Thanks for your comment on my blog, keep visiting, I am becoming your follower so I shall be coming frequently.

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  13. Ashutosh ji,bahut bahut shukriya aapka jo aapne hum jaise naye bloger ko saraha aur hume folow bhi kiya.thanx a lot nd u r a vry good writer.

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  14. नेहा जी,बहुत अच्छा लिखती हैं आप.
    कहीं डोली को खूबसूरत ज़िन्दगी मय्यसर नहीं होती.
    कहीं तो डोली भी मय्यसर नहीं होती.
    सच ही कहा है किसी ने

    फूल खिले हैं गुलशन गुलशन
    लेकिन अपना अपना दामन.

    आपकी कलम को ढेरों शुभ कामनाएं.

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  15. रुखसत तो होतीं हैं सब की डोलियाँ ,
    हर डोली की किस्मत में ज़िन्दगी खूबसूरत नहीं होती ।
    जेहि विधि राखे राम .....
    होइए वही जो राम रची राखा ....
    किस्मत कोई माँ -बाप औलाद की लिख नहीं सकता .

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  16. क्सत तो होती हैं हर किसी की डोलियाँ,
    पर हर डोली की किस्मत में ज़िन्दगी खूबसूरत नहीं होती!!
    ..sundar rachna

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  17. ACHA LAGA APKI RACHNA PADHKAR.. APNE MERA UTSAHA BDHAYA APKA BAHUT AABHAR.. AASHA HAI AAP AATEI RAHENGI. . .
    JAI HIND JAI BHARAT

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  18. 'पर हर डोली की किस्मत में जिंदगी खूबसूरत नहीं होती '

    .............वाह , बड़ी खूबसूरती से बयाँ किया है तल्ख़ सच्चाई को !

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  19. बहुत सुंदर पंक्तियां लिखी हैं आपने।
    शुभकामनाएं।

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  20. क्या मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आयीं हैं आप? 'सरयू' स्नान का न्यौता है आपको इस बार.

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  21. bahut sundar rachna or aap ne kaha ki aap blog jagat mai nayi hai par aapki kavta ke shabd to bade gaghre or anubhav liye lagte hai............bahut sundar likha hai aapne swaagat hai aapka ,,,,,,,,,,,,,

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  22. आपकी सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार|

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  23. रुक्सत तो होती हैं हर किसी की डोलियाँ,
    पर हर डोली की किस्मत में ज़िन्दगी खूबसूरत नहीं होती!!

    वर्तमान हालातों की जीती जागती तस्वीर आपने खींच दी है,शुभकामनायें.मेरे ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद भी.

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  24. डोली का अपनी किस्मत में होना न होना अलग बात है पर आपकी हिम्मत,आपकी ताकत,आपके विचार,आपकी सोच तो अपनी है और यही सबसे बड़ी पूँजी है !

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  25. neha ji
    pahli baar aapke blog par aai hun ,par sach maniye bahut hi prasannta hui .
    aap to waqi kamaal ka likhti hain .
    har panktiyan behatreen ---gazab

    रुक्सत तो होती हैं हर किसी की डोलियाँ,
    पर हर डोली की किस्मत में ज़िन्दगी खूबसूरत नहीं होती!!
    bahut hi sundar ,jitni bhi tarrif karun shayad kam hi lage -----
    kal bhi aapke blog par comments dala tha par pata nahi idhar net par kuchh gadbadi bhi ho rahi hai .shayad isiliye post nahi ho paai .
    shubh kamanao sahit
    poonam

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  26. आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा| आपकी भावाभिव्यक्ति बहुत सुन्दर है और सोच गहरी है! लेखन अपने आप में संवेदनशीलता का परिचायक है! शुभकामना और साधुवाद!

    "कुछ लोग असाध्य समझी जाने वाली बीमारी से भी बच जाते हैं और इसके बाद वे लम्बा और सुखी जीवन जीते हैं, जबकि अन्य अनेक लोग साधारण सी समझी जाने वाली बीमारियों से भी नहीं लड़ पाते और असमय प्राण त्यागकर अपने परिवार को मझधार में छोड़ जाते हैं! आखिर ऐसा क्यों?"

    "एक ही परिवार में, एक जैसा खाना खाने वाले, एक ही छत के नीचे निवास करने वाले और एक समान सुविधाओं और असुविधाओं में जीवन जीने वाले कुछ सदस्य अत्यन्त दुखी, अस्वस्थ, अप्रसन्न और तानवग्रस्त रहते हैं, उसी परिवार के दूसरे कुछ सदस्य उसी माहौल में पूरी तरह से प्रसन्न, स्वस्थ और खुश रहते हैं, जबकि कुछ या एक-दो सदस्य सामान्य या औसत जीवन जी रहे हैं| जो न कभी दुखी दिखते हैं, न कभी सुखी दिखते हैं! आखिर ऐसा क्यों?"

    यदि इस प्रकार के सवालों के उत्तर जानने में आपको रूचि है तो कृपया "वैज्ञानिक प्रार्थना" ब्लॉग पर आपका स्वागत है?

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  27. god!!!! all r superb. watever i understood really touched my heart....maan gaye aap ko. waise likhne ka shok to nahi hai mujhe. but tumhara likha hua padh kar..padhne ka shok jarur ho gaya hai.....

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